रविवार, 22 सितंबर 2013

बैतुल आईये और बाबा मठारदेव महादेव की महिमा जानिये : महाकाल भक्त

यंू तो हमारे देश में कईचमत्कारी संतमहात्मा हुए हैं। सब अपने आप मेंश्रेष्ठï कहेजाते हैं। सतपुड़ांचल की हरी- भरी वादियों मेंबसे मठों के मठाधीश बाबा मठारदेव केचमत्कार जग जाहिर हैं। बैतूलजिलेका प्रमुख औद्योगिक नगर सारनी देश-प्रदेश में सतपुड़ा ताप बिजली घर के रूपमेंजाना जाता है। यह नगर सतपुड़ा की हरी-भरी वादियों के बीच इटारसी-नागपुर रेलमार्गके घोड़ाडोंगरी रेल्वे स्टेशन से18किमी की दूरी तथा राष्टï्रीयराजमार्गकी मुख्य सड़क के बरेठा ग्राम से32किमी की दूरी पर स्थित है। इससतपुड़ा की सुरम्य पर्वत माला में 3028फीटकी ऊंचाई पर श्री- श्री 1008बाबा मठारदेवमहाराज का मंदिर बना है।किदवंती कथाओं केअनुसार समूचे मध्यप्रदेशएवं महाराष्टï्र केअसंख्य श्रद्घालूभक्तों की आस्था केप्रतीक श्री श्री 1008बाबा मठारदेव ने 300वर्ष पूर्व इस शिखर परतप किया था।ऐसी मान्यता है कि तीनशताब्दी पूर्वबरेठा बाबा, बागदेवबाबा तथा मठारदेवबाबा नामक तीनचमत्कारी संत पुरूष भगवानशिव के उपासक केरूप में प्रसिद्घ थे।बाबा मठारदेव के तप बल केप्रताप से ही बीतेकई सालों से क्षेत्र केलोगों का जीवनखुशहाल एवं संपन्न है।बाबा की पहाड़ी केनीचे कल-कल करबहती तवा नदी के किनारेबना सारनी तापबिजली घर एवं प्रचुरमात्रा में जमीन के गर्भमेंछुपी पाथाखेड़ा की 8 कोयला खदानों मेंसेनिकलने वाला कोयला बाबा केचमत्कारकी देन है। मौजूदा दौर मेंसारनी तापबिजली घर में बिजली का विपुलकीर्तिमानउत्पाद नऔरपाथाखेड़ा की खदानों को मिलनेवालेपुरूस्कार बाबा के आशिर्वादका प्रसादमानते हैं। बाबा के चमत्कार के कारणउनकेअनुयायी विभिन्न धर्म,संप्रदायतथा आचार-विचार के बादभी बाबा के दरबारमें अपनी मुराद के लिए दौड़ेचले आते हैं।मनचाही मुराद पूरी होने पर बाबा केस्थान परबकरे, मुर्गे की बलि देते हैं।श्री श्री 1008 बाबा मठारदेव के बारे मेंकुछलोगों का कहना है कि बाबा नेपंचमढ़ी स्थितचौरागढ़ पर्वत के नीचेभुरा भगत आश्रम मेंरहकर कठोर तप किया तबदेवाधिदेव भगवानमहादेव ने अपने दिव्य दर्शनदेकरबाबा को सतपुड़ा पर्वत श्रेणी में अपनेएकनिवास स्थान जिसे लोग भोपाली केछोटेमहादेव के नाम से पूजते हैं। इसस्थानका पता बता कर बाबा मठार देवको सिद्घसंत पुरूष बनने का आशिर्वाद दिया।इस बारेमें जानकार लोगों नेबताया कि बाबा प्रतिदिनब्रम्ह मुहुर्त मेंभूरा भगत आश्रम से निकलकर पवित्रतवा नदी में स्नान करछोटा महादेव जाकरप्राकृतिक रूप से बनेशिवलिंग का जलअभिषेक, पूजन सूर्यअस्ततक करने के बादवापस भूरा भगत आकरविश्राम करते थे।बाबा मठारदेव का यहनित्यकर्म बरसों तकचला। एक कथा इसप्रकार की है कि एक समयमकर संक्राति परसूर्य ग्रहण पड़ा। उस समयबाबा नेतवा नदी के गहरे जल में शिवआराधना करभगवान आशुतोष से यहआशिर्वाद प्राप्तकिया कि वे आज के बादसतपुड़ा की इनश्रेणियों में आने वाले मठों केमठाधीश कहेजायेंगे। शिव आशिर्वाद केकारणही बाबा मठारदेव कहलाये। एककिदवंती कथा बाबा मठार देव के बारे मेंयहभी है कि बाबा ग्वाला जाति के थे। वेग्वालों की खोई हुई भैसों को चराया करते थे।वहीं पर दूसरी ओर कोरकू जाति केलोगबाबा को अपनी बिरादरी का मानते हैं। जानकारों का तो यहां तककहना हैकि बाबा की एक बहन तथा एक पुत्रभी है।बहन का निवास स्थान उसी पीपल के पेड़मेंथा जो नहीं कटता था। सारनी दमुआ मार्गपरस्थित कुवर देवबाबा को बाबा का पुत्रबताने वाले जानकारबताते हैंकि बाबा की 3028फिटऊंची पहाड़ी का रास्ता लोनिया,राजेगांवखापा, खैरवानी,सारनी केलोगों की सहायता से बना है। इसपर्वतमाला पर जंगली बाबा, महंतगिरी नागा बाबा,रामलाल बाबा नेअपना डेरा बनाया था। शिवआराधना का चमत्कार कहलीजियेकि बाबा के निवास स्थान के पास एकलंगड़ेसफेद शेर की गुफा थी जिसमेंवहरहा करता था। जब ग्वालों केपालतूजानवरों का शेर शिकार करते थे तबबाबा नेही शेर के आतंक सेग्वालों को मुक्ति दिलाई। इस शेर को बाबा नेअपना सहचर बना लिया।कहा जाता है कि शेरके आतंक से भय मुक्तग्वालेबाबा को प्रतिदिन मठा और दूधदिया करते थे।बाबा के पास इतना दूधआता था कि उस दूध सेबाबा ने 3028 फीटऊंची पहाड़ी पर एक तालाबभर दिया। जिसकेअंश आज भी मौजूद हैं। बाबा के चमत्कार केकारण आज भी इसआसपास के क्षेत्र केग्वाले बाबा के अनन्यभक्त हैं तथा वेबाबा को मठा व दूध चढ़ाते हैं। बाबा की ऊंची पर्वत माला पर जाने वाले तेढ़े-मेढ़े ऊबड़-खाबड़ रास्तों के बीच एक स्थानपरचमेली वाले बाबा की अदृश्य मजारभी कुछलोगों ने देखने का दावा किया है। बीचरास्ते मेंचमेली की खुशबू महसूस करने वालेइस अदृश्यमजार के चमत्कार सेकाफी परिचित हैं।लोगों को कई बार बीचरास्ते में चमेली के फूलभी मिले हैं। एक प्रकारसे देखा जाए तो यहपर्वत माला चमत्कारों सेभरी पड़ी है। एकप्रचलित कथा इस प्रकारकी है कि बाबा ने3028 फीट की विशालपर्वत माला में एक ऐसेजल का भंडार उनकेभक्तों को दिया है कि वहआज भी निरंतरबहता ही रहता है। इस पर्वतशिखरमाला का जल जिसमें कई प्रकारकी जड़ी-बूटी घुल कर समाहित है, पेटकी बीमारियों केलिए एवं हृदय रोगियों के लिएरामबाणसाबित हुआ है। बाबा के इसचमत्कारिक जलको लोग पाने के लिए कतारबद्घ रूप में खड़ेरहते हैं। बाबा के चमत्कारका ज्वलंतउदाहरण है कि उनके अनन्य भक्तपंजाबरावकुंभारे जो विद्युत मंडल में संयंत्रपरिचायकश्रेणी एक के पद पर कार्यरत हैंजो कि 1995में लकवा (पक्षघात) से बुरी तरहग्रसित थे। बाबा केप्रति उनकी श्रद्घा थी इसलिए वेबैसाखी केसहारे रोज बाबा के दरबार मेंआया करते थे। एकदिन अचानक बाबा केचमत्कार से उसके पैरों नेबिना बैसाखी केही जब चलना शुरू कर दिया,तब से पंजाबरावने बाबा के मंदिर प्रतिदिन 30किलो निर्माणसामग्री शिखर पर अपनेहाथों मेंझोलिया टांग कर ले जाना शुरूकिया जो आजभी जारी है। श्री कुंभारे केद्वारा प्रतिवर्षएक टन सेभी ज्यादा सामग्री पहुंचाईजाती है। विशालपर्वत शिखर पर बनेबाबा के मंदिर में लगी ऊँकी आकृति जबबिजली के प्रकाश से चमकती हैतबउसकी अद्भुत छटा देखने लायक होती है।बाबा के बारे में एक जानकारी यह भी हैकि जबसारनी तापबिजली घरकी स्थापना की जा रही थी तब एकपीपलका पेड़ पावर हाऊस परिसर में स्थितथा।अमेरिका कंपनी एमडबल्यूकेअधिकारी मोरीसन एवं उसके नेतृत्व मेंकामकर रहे मजदूर जब भी पीपल के उसपेड़को काटने के लिए जाते थे, तो वह आगेबढ़जाता था। कुछ लोग कहते हैंकि वहकुल्हाड़ी से कटता ही नहीं था।काफी प्रयासों के बाद सफलता नहीं मिली,तबएक दिव्य पुरूष ने आकरबाबा मठारदेवकी पूजा- अर्चना की युक्ति बतलाई। बाबा केचमत्कारके बारे में सारनी ताप बिजली घरकेकर्मचारी बताते हैं कि बाबा के मंदिर में1966में तत्कालिक सतपुड़ा ताप बिजली घरकेप्रोजेक्ट आफिसर डीएसतिवारी नेपहली बार बिजली पहुंचाई जो आजतक जलरही है। कहा जाता है कि 1966 सेसारनी तापबिजली घर में दुर्घटनाएंतथा अकाल मौत मेंकमी आई है। एक बारबाबा के मंदिर में लाईटनहीं जली तो 31 मार्च83 को 12 लोग जलगए। जिसमें 6 की जीवनलीला समाप्तहो गई। इसी तरह एक बार फिरमंदिरकी बिजली गुल हो गई तो 14लोगों को लेजा रही नाव राजडोह में डूब गई।जिसमें एकभी जीवित नहीं बचा। 93 में बंकरकी क्षति केपीछे भी मंदिरका अंधेरा बताया जाता है। लोगशाम होतेही बाबा की लाईट देखकर तापबिजली घरकी तथा आम जन मानसकी खुशहाली की कामना करते हैं।बाबा की इसशिखर माला परबिजली व्यवस्था के लिए 74पोल लगाए गएहैं, जिनकी देख- रेखनगरपालिका प्रशासनकरता है। सारनी केचमत्कारी बाबा देव की हरी- भरी सुरम्यमनोहरी वादियों में बसेश्री श्री 1008बाबा मठारदेव के बारे मेंकहा जाता है कि इसदिव्य पुरूष ने अपनेचमत्कार के सामने भारतशासन तथा राज्यशासन के अनेकमंत्रियों को अपना भक्तबना रखा है। जिसभी मंत्री ने बाबा के दरबारमें हाजरी नहीं लगाईवे यहां से जाने के बादअपना पद गवा चुके हैं। इस बात को प्रमाणितकरती लंबी चौड़ी लिस्टबाबा के चाहनेवालों के पास रहती है।बाबा की शिखरमाला के हरे- भरेपेड़ों की रक्षा सुरक्षा केलिए सारनी केपर्यावरणप्रेमी काफी प्रयासरत हैं। ओमकारसिंहराजपूत की मित्रमंडली के पर्यावरणक्लबकी मेहनत से कई हरे भरेपेड़ों को जीवनदिया है। बाबा की शिखर पर्वतमाला को एकरमणीय पर्यटक स्थल बनाने केलिए इसक्षेत्र के नागरिकों, मेला समिति केसदस्यों,बैतूल जिले के पालक मंत्री एवंअजाकराज्यमंत्री प्रतापसिंह उइके नेअपनी ओरसे राज्य शासन से की है तथा वे इसेपर्यटकस्थल बनाने के लिए प्रयासरत् हैं।यहां प्रतिवर्ष 14जनवरी को मकरसंक्राति पर्व परसारनी नगरपालिका परिषद एवं मठारदेवसमिति केसहयोग से 10 दिवसीय विशालमेलेका आयोजन किया जाता है। इस मेंलेमेंहजारों श्रद्घालू, बच्चे, बूढ़े, जवान,महिला,पुरूष टेड़े दुर्गम रास्तों से एकदूसरेका सहारा लेकर बिना थकान केबाबा केदर्शन हेतु शिखर पर पहुंचते हैं। शिखरमंदिरपर मठार देवसमिति द्वारा बाबा केभक्तों को दर्शन एवंपेयजल की समुचितव्यवस्था की जाती है। बाबा का मेला 1974से लगातार लग रहा है।पहले एक दिनका तथा बाद में 1983 से तीन दिनऔर अब12 दिनका मेला लोगों की आस्था का केन्द्रबना हुआहै। इस मेले में एक दिनका भंडारा कार्यक्रमजीएस ठाकुरतथा आरएस तैलगें के नेतृत्वमेंबनी भंडारा समिति द्वारा मेले मेंदर्शनार्थआनेवालों को प्रसादी वितरणकिया जाता है। मेले मेंमठारदेव समिति केमाध्यम से कार सेवा चलाईजाती है। जिसमेंछोटी-छोटी थैलियों में भरकररेत, ईट, सीमेंटइत्यादि सामग्री शिखर परपहुंचाई जाती है।पर्वत शिखर पर बरसात मेंमंदिर निर्माणसंपादित होता है। इस 3028 फीटकी ऊंचाईपर साल भर बाबा के भक्त आना-जाना करतेहैं। कुछ लोग तो ऐसे भी हैंजो बाबा केप्रतिदिन दर्शन जाने के लिएप्रयासरत हैं। इस तिथि में शिव मंदिर में शिवलिंग प्राण- प्रतिष्ठïा का कार्यक्रमहोना प्रस्तावितहै। बाबा मठारदेव समिति नेइतिहास पुरूषराणा सांगा की तरह मंदिरका कार्य शुरूकिया है। सारनी ताप बिजली घरकेमुखिया आरएस अगस्तिया इससमिति केकार्य से प्रसन्न हैं। बाबा की सेवा मेंसदैवतत्पर रहने वाले पाथाखेड़ा कोल संस्थान

गुरुवार, 29 अगस्त 2013

ॐ श्री गणेशाय नमःबाबा मठारदेवकी आरती ॐ जे मठ के वासी,स्वामी जे मठ केवासी तेरी शरण में आये,तेरी शरण में आये हमसेवक बाबा !! ॐ जय जयहो बाबा.... सीधे सरलग्वाल के संग, बन बनघुमे बाबा .... दूध, मठा,मही पीकर, दूधमठा मही पीकर मगन रहे बाबा !!ॐ जय जयहो बाबा.... कंधे पर प्रेम पोटली,कानो में कुंडलबाला जाता जूट और मस्तकचंदन, जाता जूटऔर मस्तक चंदन गलेकन्थीमाला !! ॐ जयजय हो बाबा घोरघाना जंगल में मंगला, प्रेमका अलख जगायेऊँचे पर्वत पर है मढिया, ऊँचेपर्वत पर हैमढिया भक्ति की धुनी रमाये !! ॐजय जयहो बाबा.... ऊँचा पर्वत ऊँची मढिया,ऊँचा कामतेरा बाबा जपे निरंतर जै शिवशंकरजपे निरंतरजै शिवशंकर नाम अक्षर बाबा !!ॐ जै जयहो बाबा नित्य प्रेम से जाये नाम जो,जै मठ केबाबा मनकी इच्छा पूरण करते, मनवांछित फलदेने वाले जै मठार देव बाबा !! ॐजय जयहो बाबा.... ॐ जे मठ के वासी,स्वामी जय जयहो बाबा तेरी शरण में आये,तेरी शरण में आय